जिंदगी ने की है कैसी साजिशें
अधूरी रही दिल की वो फरमाईशें
मांगी दुआ जो, तुझ तक ना पोहोची
परवरदिगार
क्यों ना सुनी तूने मेरी ख़ामोशी
परवरदिगार
ये फितूर मेरा लाया मुझको था तेरे करीब
ये फितूर मेरा, रेहमत ना की
ये फितूर मेरा क्यों ना बदला रे मेरा नसीब
ये फितूर मेरा, चाहत ना की
ओ परवरदिगार ...
अधूरी रही दिल की वो फरमाईशें
मांगी दुआ जो, तुझ तक ना पोहोची
परवरदिगार
क्यों ना सुनी तूने मेरी ख़ामोशी
परवरदिगार
ये फितूर मेरा लाया मुझको था तेरे करीब
ये फितूर मेरा, रेहमत ना की
ये फितूर मेरा क्यों ना बदला रे मेरा नसीब
ये फितूर मेरा, चाहत ना की
ओ परवरदिगार ...
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